तुम्हारे शहर में चलती है नफ़रतों की हवा हमारे गाँव का मौसम अभी सुहाना है
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बंसी सब सुर त्यागे है, एक ही सुर में बाजे है हाल न पूछो मोहन का, सब कुछ राधे राधे है
Zubair Ali Tabish
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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ज़हर ने उस को ज़िंदगी दे दी वरना सुकरात मर गया होता
Abdulla Asif
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तू नुक़्ताचीं ज़रा चखकर बता कि आख़िर ज़हर में क्या नुक़्स है
Abdulla Asif
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अफ़लाक से आगे न निकल जाएँ तसव्वुर महदूद ज़मीं तक ही ख़यालों को रखें आप
Abdulla Asif
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क़ीमत मुकर्रर है तिरी हम तो मुनासिब दाम हैं
Abdulla Asif
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ज़िन्दगी मेरी नज़रों से तू गिर चुकी और मैं भी गिरी चीज़ रखता नहीं
Abdulla Asif
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