तुम्हारी अक़्ल के पर्दे उठाएगा नहीं कोई ख़ुद आना होगा रस्ते पे तो लाएगा नहीं कोई
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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पूछते हैं वो कि ग़ालिब कौन है कोई बतलाओ कि हम बतलाएँ क्या
Mirza Ghalib
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नूर-ए-ख़ुदा है हर इंसाँ में फिर किस को नाशाद करोगे
Nityanand Vajpayee
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मिलो जब भी कभी जाहिल से तो ख़ामोश रहिए आप मियाँ जाहिल को आलिम से अजब तकलीफ़ होती है
Nityanand Vajpayee
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रहे हो आप काँटों में महीनों तक मेरे दिलबर बस इक शब होने को सोचा था हम-बिस्तर चले आते
Nityanand Vajpayee
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वादों से मुकर जाना तो फ़ितरत है तुम्हारी कुछ और नया खेल दिखाओ तो बने बात
Nityanand Vajpayee
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झूठ जुमला है कि मर्दों को नहीं होता है दर्द हर बशर की रूह को ग़म सालता तो ख़ूब है दोस्ती कर ली हो जिसने रंज-ओ-ग़म की शाम से दर्द ही दुश्मन है उसका दर्द ही महबूब है
Nityanand Vajpayee
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