तुम्हारी याद क्या आई ज़रा सी चमक चेहरे पे फ़ौरन आ गई फिर
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पूछते हैं वो कि ग़ालिब कौन है कोई बतलाओ कि हम बतलाएँ क्या
Mirza Ghalib
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अब मैं सारे जहाँ में हूँ बदनाम अब भी तुम मुझ को जानती हो क्या
Jaun Elia
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तुम्हारी आँखों की तौहीन है ज़रा सोचो तुम्हारा चाहने वाला शराब पीता है
Munawwar Rana
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मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
Tehzeeb Hafi
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आईने आँख में चुभते थे बिस्तर से बदन कतराता था एक याद बसर करती थी मुझे मैं साँस नहीं ले पाता था
Tehzeeb Hafi
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ज़िंदगी भी ख़त्म होती ही नहीं और ये उदासी जान लेने पर तुली है
Yashvardhan Mishra 'Hind'
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तुम्हारी याद क्या आई ज़रा सी चमक चेहरे पे फ़ौरन आ गई फिर
Yashvardhan Mishra 'Hind'
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तुम्हारे बिन नहीं लेते कभी करवट अकेले हम तुम्हारी याद भी करवट हमारे साथ लेती है
Yashvardhan Mishra 'Hind'
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तीरगी-ए-ज़ीस्त कर दी ख़त्म इसने रौशनी है फूल सी बच्ची हमारी
Yashvardhan Mishra 'Hind'
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ज़िंदगी तो ज़िंदगी इस मौत पर अब ख़ुदा से ही शिकायत हो रही लग गया हूँ काम पर जब से तिरे साथ रहमत और बरकत हो रही
Yashvardhan Mishra 'Hind'
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