तीरगी-ए-ज़ीस्त कर दी ख़त्म इसने रौशनी है फूल सी बच्ची हमारी
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उस की जुल्फ़ें उदास हो जाए इस-क़दर रौशनी भी ठीक नहीं तुम ने नाराज़ होना छोड़ दिया इतनी नाराज़गी भी ठीक नहीं
Fahmi Badayuni
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किसी बहाने से उस की नाराज़गी ख़त्म तो करनी थी उस के पसंदीदा शाइ'र के शे'र उसे भिजवाए हैं
Ali Zaryoun
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इस तरह करता है हर शख़्स सफ़र अपना ख़त्म ख़ुद को तस्वीर में रखता है चला जाता है
Sandeep kumar
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मुझे अँधेरे से बात करनी है सो करा दो, दिया बुझा दो कुछ एक लम्हों को रौशनी का गला दबा दो, दिया बुझा दो रिवाज़-ए-महफ़िल निभा रहा हूँ बता रहा हूँ मैं जा रहा हूँ मुझे विदा दो, जो रोना चाहे उन्हें बुला दो, दिया बुझा दो
Vikram Gaur Vairagi
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निगाह-ए-शोख़ का क़ैदी नहीं है कौन यहाँ किसे तमन्ना नहीं फूल चूमने को मिले
Aks samastipuri
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ज़िंदगी भी ख़त्म होती ही नहीं और ये उदासी जान लेने पर तुली है
Yashvardhan Mishra 'Hind'
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तुम्हारे बिन नहीं लेते कभी करवट अकेले हम तुम्हारी याद भी करवट हमारे साथ लेती है
Yashvardhan Mishra 'Hind'
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हिज्र में चैन मुझ को मिलता है तेरी तस्वीर चूम लेने से
Yashvardhan Mishra 'Hind'
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किसी भी वक़्त अब तो टूट सकती है तुम्हारी याद की ये अलगनी जानाँ
Yashvardhan Mishra 'Hind'
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तुम्हारी याद क्या आई ज़रा सी चमक चेहरे पे फ़ौरन आ गई फिर
Yashvardhan Mishra 'Hind'
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