तुम्हें ही प्रीत था करना न आया ये सभी कहते रहे थे कर वफ़ा लो तुम
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दिन में मिल लेते कहीं रात ज़रूरी थी क्या? बेनतीजा ये मुलाक़ात ज़रूरी थी क्या मुझ सेे कहते तो मैं आँखों में बुला लेता तुम्हें भीगने के लिए बरसात ज़रूरी थी क्या
Abrar Kashif
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दौलत शोहरत बीवी बच्चे अच्छा घर और अच्छे दोस्त कुछ तो है जो इन के बा'द भी हासिल करना बाक़ी है कभी-कभी तो दिल करता है चलती रेल से कूद पड़ूॅं फिर कहता हूँ पागल अब तो थोड़ा रस्ता बाक़ी है
Zia Mazkoor
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हम हैं ना! ये जो मुझ सेे कहते हैं ख़ुद किसी और के भरोसे हैं ज़िंदगी के लिए बताओ कुछ ख़ुद-कुशी के तो सौ तरीक़े हैं
Vikram Gaur Vairagi
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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जहाँ से जी न लगे तुम वहीं बिछड़ जाना मगर ख़ुदा के लिए बे-वफ़ाई न करना
Munawwar Rana
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वही फिर बात होने से ख़फ़ा हो तुम वहीं फिर बात करने की मुआ'फ़ी है
Amanpreet singh
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वो पहाड़ों से यूँँ नीचे देखता है जैसे अब भी बाबा नीचे बैठे होंगे
Amanpreet singh
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तुम्हें ये सब समझने में अभी थोड़ा समय तो है किसी ने ज़िंदगी कैसे दुखी हो कर निकाली थी
Amanpreet singh
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तुझे तेरी मोहब्बत की क़सम है अब मिटाना है गुमाँ सब इश्क़ को ले कर
Amanpreet singh
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मुझे अब याद सी आ तो रही है आप की बातें तो अच्छा इस लिए कहते थे मिलना ठीक रहता हैं
Amanpreet singh
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