तुम्हें तो ख़ुश-नुमा ख़ुश-रंग है हर एक मौसम ही मगर फ़ुटपाथ के लोगों पे हर मौसम मुसीबत है
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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मर चुका है दिल मगर ज़िंदा हूँ मैं ज़हर जैसी कुछ दवाएँ चाहिए पूछते हैं आप आप अच्छे तो हैं जी मैं अच्छा हूँ दुआएँ चाहिए
Jaun Elia
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दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है लंबी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है
Faiz Ahmad Faiz
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ख़ुद से भी मिल न सको, इतने पास मत होना इश्क़ तो करना, मगर देवदास मत होना देखना, चाहना, फिर माँगना, या खो देना ये सारे खेल हैं, इन में उदास मत होना
Kumar Vishwas
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ज़रूरत क्या तिजारत-गार को ख़ुद हाथ रँगने की ठिकाने कुछ लगाना हो अगर सरकार बैठी है
Mohit Subran
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ज़रा से शक पे हुआ ख़त्म राब्ता लेकिन ज़रा सा शक न हुआ ख़त्म दरमियाँ से मगर
Mohit Subran
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ये कैसा इम्तिहाँ आख़िर ये कैसी आज़माइश है समझ में आ गया है सब दिली क्या तेरी ख़्वाहिश है अगर तू चाहता है ऐसा तो ले होने देता हूँ वगरना जानता हूँ पहले से क्या तेरी साज़िश है
Mohit Subran
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यक़ीं ईमाँ वफ़ादारी की बातें तू न कर मुझ से तिरी ही वज्ह से खाए हैं जितने धोके खाए हैं
Mohit Subran
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यक-ब-यक उट्ठा ज़ेहन से पर्दा और सब कुछ दिखाई देने लगा
Mohit Subran
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