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तुम्हें तो यूँँ ही किस्मत से मोहब्बत मिल गई थी ना अगर मेहनत से मिलती तो जुदा होने का ग़म होता

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उस ने वा'दा यही किया मुझ से और फिर भी नहीं मिला मुझ से कैसे दूँगा उसे वही धोखा उस का ज़्यादा है तजरबा मुझ से

anupam shah

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चुप रह कर सुलझा पाओ तो ग़ुस्सा होकर मत दिखलाना परदों से गर काम बने तो दीवारों को मत खिंचवाना

anupam shah

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हँसना-वसना धीरे धीरे कम होगा धीरे धीरे दिख जाएँगे सब चेहरे

anupam shah

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लो ख़ुद मुख़्तार होकर देखते हैं कि अपने यार होकर देखते हैं बचे बर्बाद होने से हैं अब तक चलो इस बार होकर देखते हैं यहाँ से मसअला ये हल न होगा इसे उस पार होकर देखते हैं कोई ख़तरा नहीं है दुश्मनी में किसी का प्यार होकर देखते हैं

anupam shah

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हसीं कुछ ख़्वाब आँखों को कभी सस्ते नहीं मिलते कभी मंज़िल नहीं मिलती कभी रस्ते नहीं मिलते

anupam shah

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