तुम सेे मिलने के बा'द ऐ हमदम ख़ुद से बेज़ार हो गया हूँ मैं
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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क्या ख़बर कौन था वो, और मेरा क्या लगता था जिस सेे मिल कर मुझे, हर शख़्स बुरा लगता था
Tehzeeb Hafi
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बड़े नादान हो तुम भी ज़रा समझा करो बातें गले मिल कर जो रोती है बिछड़ कर कितना रोएगी
Ankita Singh
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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मुरझा गया गुलाब तो अफ़सोस ये हुआ नाहक़ जुदा किया उसे शाख़ों से तोड़ कर
Gulshan
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भूखे थे और भूखे ही रह जाएँगे मर जाएँगे हाथ नहीं फैलाएँगे
Gulshan
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जब भी मिलते हैं तहे दिल से दुआ देते हैं ऐसे होते हैं मोहब्बत को निभाने वाले
Gulshan
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मेरे दस्त-ए-तमन्ना पर तुम्हारे हाथ का होना बड़े हासिद बनाएगा बहुत से दिल जलाएगा
Gulshan
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बड़ा चालाक बनकर के मेरी ता'रीफ़ करता था ज़रूरत से अधिक ता'रीफ़ भी अच्छी नहीं होती
Gulshan
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