उस एक चेहरे पर रफ़ीक़ सुब्ह का ख़िताब है ज़बीं है आसमान और बिंदिया आफ़ताब है
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गले मिलना न मिलना तो तेरी मर्ज़ी है लेकिन तेरे चेहरे से लगता है तेरा दिल कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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परों को खोल ज़माना उड़ान देखता है ज़मीं पे बैठ के क्या आसमान देखता है
Shakeel Azmi
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यूँँ जो तकता है आसमान को तू कोई रहता है आसमान में क्या
Jaun Elia
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तेरा चेहरा सुब्ह का तारा लगता है सुब्ह का तारा कितना प्यारा लगता है तुम से मिल कर इमली मीठी लगती है तुम से बिछड़ कर शहद भी खारा लगता है
Kaif Bhopali
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देखा है ज़िन्दगी को कुछ इतने क़रीब से चेहरे तमाम लगने लगे हैं अजीब से
Sahir Ludhianvi
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पहले बेचारी आँखों के निखार उतरते होंगे तब जा कर इन आँखों से त्योहार उतरते होंगे
Aarush Sarkaar
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लाने को तो चाँद सितारे लाएँगे जान लाने वाले पर हम इकलौते हैं तुझ पर अपना ईमान लाने वाले
Aarush Sarkaar
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सामने वो यूँँ मिरे डब्बा टिफ़िन का रखती थी जैसे थाली खाने की बीवी लगाकर देती है बाग के सब फूल मालन मुरझा ना जाएँ यूँ भी तू नज़र नईं डाले, बस पानी लगाकर देती है
Aarush Sarkaar
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मत कहो मिरे हमदम ये कि राएगाँ हो तुम इक जहाँ के बंदे का, यार दो जहाँ हो तुम
Aarush Sarkaar
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जिस को हर बात बुरी लगती है अब के मेरी उस सेे मिलता था हर इक बात पे बोसा पहले
Aarush Sarkaar
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