sherKuch Alfaaz

उस घूँघट में इक चेहरा है उस चेहरे पे इक तिल भी है उस तिल पे हमारी जान फिदा कुरबान उसी पर दिल भी है वो सत्रह आशिक़ क़त्ल हुए इन तेरी फ़रेबी नज़रों से इक हद तक तो मासूम तू है पर इक हद तक क़ातिल भी है

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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है

Abrar Kashif

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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो

Tehzeeb Hafi

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हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा

Allama Iqbal

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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा

Ahmad Faraz

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हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो

Jaun Elia

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तुझे शीशा बनाया है ख़ुदा ने ध्यान रक्खा कर गले पत्थर के जो लगने लगेगा टूट जाएगा

Shubham Seth

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शिकायत के सिवा देखो उसे कुछ भी नहीं आता अगर हम एक-दो कर दें उसी पर रूठ जाता है

Shubham Seth

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पानी में मैं डूब रहा हूँ देख मुझे दरिया से ख़ुद दूर किनारा जाएगा

Shubham Seth

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मुझे इस इश्क़ ने तेरे बड़ा लाचार कर डाला अजी लाचार क्या पूरी तरह बेकार कर डाला मिरे हाकिम बड़ा जादू दिखाते हैं क्या देखोगे? मरे थे चार सौ लेकिन उसे बस चार कर डाला

Shubham Seth

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कभी राहें मैं भूलूँ तो कभी घर भूल जाता हूँ सिवा तेरे सभी चीजें मैं अक्सर भूल जाता हूँ अचानक नींद से उठकर कभी भी रोने लगता हूँ तुझे क्या सच में लगता है मैं सोकर भूल जाता हूँ

Shubham Seth

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