कभी राहें मैं भूलूँ तो कभी घर भूल जाता हूँ सिवा तेरे सभी चीजें मैं अक्सर भूल जाता हूँ अचानक नींद से उठकर कभी भी रोने लगता हूँ तुझे क्या सच में लगता है मैं सोकर भूल जाता हूँ
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माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख
Allama Iqbal
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ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
Tehzeeb Hafi
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मर चुका है दिल मगर ज़िंदा हूँ मैं ज़हर जैसी कुछ दवाएँ चाहिए पूछते हैं आप आप अच्छे तो हैं जी मैं अच्छा हूँ दुआएँ चाहिए
Jaun Elia
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तुझे शीशा बनाया है ख़ुदा ने ध्यान रक्खा कर गले पत्थर के जो लगने लगेगा टूट जाएगा
Shubham Seth
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किसी की ख़्वाहिशों को कब तलक तुम बाँध पाओगे बड़ा वो पेड़ होगा और गमला टूट जाएगा
Shubham Seth
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हँसती गाती अपनी आँख भिगो दोगे हाल हमारा जानोगे तो रो दोगे
Shubham Seth
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मुझे इस इश्क़ ने तेरे बड़ा लाचार कर डाला अजी लाचार क्या पूरी तरह बेकार कर डाला मिरे हाकिम बड़ा जादू दिखाते हैं क्या देखोगे? मरे थे चार सौ लेकिन उसे बस चार कर डाला
Shubham Seth
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उस घूँघट में इक चेहरा है उस चेहरे पे इक तिल भी है उस तिल पे हमारी जान फिदा कुरबान उसी पर दिल भी है वो सत्रह आशिक़ क़त्ल हुए इन तेरी फ़रेबी नज़रों से इक हद तक तो मासूम तू है पर इक हद तक क़ातिल भी है
Shubham Seth
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