उसे लग जाए कैसे भी लत हमारी खु़दाया बस यही हैं चाहत हमारी
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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तू किसी और ही दुनिया में मिली थी मुझ सेे तू किसी और ही मौसम की महक लाई थी डर रहा था कि कहीं ज़ख़्म न भर जाएँ मेरे और तू मुट्ठियाँ भर-भर के नमक लाई थी
Tehzeeb Hafi
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ज़रा वो पास क्या आने लगा मेरे मुझे लगने लगा सब मिल गया मुझ को
Kaviraj " Madhukar"
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यूँँ तो बहुत है काम पर करना मुझे बस इश्क़ हैं
Kaviraj " Madhukar"
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यही तो बस हक़ीक़त है समझती क्यूँ नहीं रिमझिम मुझे तुम से मुहब्बत है समझती क्यूँ नहीं रिमझिम ये दुनिया क्या मुझे कुछ भी मिले मैं छोड़ सकता हूँ मुझे बस तेरी चाहत है समझती क्यूँ नहीं रिमझिम
Kaviraj " Madhukar"
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तुम बेहद मुश्किल हो जानाँ तुम को पाना आसान नहीं
Kaviraj " Madhukar"
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तुम्हारी आँख पे काजल जमें है यूँँ कि जैसे आसमाँ पे जम रहे बादल
Kaviraj " Madhukar"
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