उसे तू छू ले बस अब ज़िस्म देता ये हिदायत है ये सोचा कैसे मेरा रूह करता ये शिकायत है मेरे ख़त को जलाकर कहती है अच्छा लिखा तुम ने, ख़ुदा तू ही बता दे ज़ुल्म है या फिर इनायत है
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हम ने दुनिया की तरफ़ देखा नहीं तुम को चाहा और कुछ सोचा नहीं
Aalok Shrivastav
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डर है घर में कैसे बोला जाएगा छोड़ो जो भी होगा देखा जाएगा मैं बस उस का चेहरा पढ़ कर जाऊँगा मेरा पेपर सब सेे अच्छा जाएगा
Vishal Singh Tabish
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तितली से दोस्ती न गुलाबों का शौक़ है मेरी तरह उसे भी किताबों का शौक़ है
Charagh Sharma
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वो अफ़्साना जिसे अंजाम तक लाना न हो मुमकिन उसे इक ख़ूब-सूरत मोड़ दे कर छोड़ना अच्छा
Sahir Ludhianvi
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मैं ने जो कुछ भी सोचा हुआ है, मैं वो वक़्त आने पे कर जाऊँगा तुम मुझे ज़हर लगते हो और मैं किसी दिन तुम्हें पी के मर जाऊँगा
Tehzeeb Hafi
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मेरी चाहत किसी आँगन की तुलसी है मैं कैसे घर में लाऊँ माँ कोई तुलसी
100rav
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तुझे मैं ज़िंदगी की इक ज़रूरत था मुझे तू जीने की ख़ातिर ज़रूरी है
100rav
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मेरी हालत देख कर भी लोग अब उस गली से हाँ गुज़रते ही नहीं
100rav
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हमारा मिलना क़िस्मत में नहीं कह कर किसी के साथ उस ने घर बसाया है
100rav
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सात फेरे मत ले लेना कोर्ट मैरिज करना तुम तो काश हो पाऊँ तुम्हारा मैं किसी और ही जनम में
100rav
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