उस का आना है कि जैसे किसी स्टेशन पर रेल कुछ देर को आती है चली जाती है
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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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किसी गली में किराए पे घर लिया उस ने फिर उस गली में घरों के किराए बढ़ने लगे
Umair Najmi
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क्यूँ डरें ज़िन्दगी में क्या होगा कुछ न होगा तो तजरबा होगा
Javed Akhtar
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उलझ कर के तेरी ज़ुल्फ़ों में यूँँ आबाद हो जाऊँ कि जैसे लखनऊ का मैं अमीनाबाद हो जाऊँ मैं यमुना की तरह तन्हा निहारूँ ताज को कब तक कोई गंगा मिले तो मैं इलाहाबाद हो जाऊँ
Ashraf Jahangeer
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ये ग़म है तेरे ना होते हुए भी मुस्कुराना है हवा भी साथ रखनी है दियों को भी जलाना है
Prashant Sitapuri
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ये मान लिया मैं ने बदला हूँ बहुत लेकिन ये ठीक है क्या पहले जैसी ही रही हो तुम
Prashant Sitapuri
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रब हो सकता गर बदला तो बदले में तुम ये कर दो माँ को मेरी ठीक करो मुझ को बीमार भले कर दो
Prashant Sitapuri
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तुम्हें कुछ दे नहीं सकता मगर फिर भी फ़कीरी में निकलती है दुआ मुझ सेे
Prashant Sitapuri
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वो कक्षा दस की यादें वो हिंदी का पहला पेपर वो लंबी पटरी वाली लड़की याद बहुत आती है मुझ सेे प्यार बहुत है तो अपने आप ही जाने वो क्यूँँ कह दूँ यारों मुझ को उस की याद बहुत आती है
Prashant Sitapuri
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