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उस को हम से बेवफ़ाई करनी थी वो कर गई अब उठो यारों कहीं चलते हैं खाना खाने हम

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तू किसी और ही दुनिया में मिली थी मुझ सेे तू किसी और ही मौसम की महक लाई थी डर रहा था कि कहीं ज़ख़्म न भर जाएँ मेरे और तू मुट्ठियाँ भर-भर के नमक लाई थी

Tehzeeb Hafi

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गले तो लगना है उस से कहो अभी लग जाए यही न हो मेरा उस के बग़ैर जी लग जाए मैं आ रहा हूँ तेरे पास ये न हो कि कहीं तेरा मज़ाक़ हो और मेरी ज़िंदगी लग जाए

Tehzeeb Hafi

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अदाकार के कुछ भी बस का नहीं है मोहब्बत है ये कोई ड्रामा नहीं है जिसे तेरी आँखें बताती हैं रस्ता वो राही कहीं भी पहुँचता नहीं है

Zubair Ali Tabish

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बात करो रूठे यारों से सन्नाटों से डर जाते हैं प्यार अकेला जी लेता है दोस्त अकेले मर जाते हैं

Kumar Vishwas

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मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही हो कहीं भी आग लेकिन आग जलनी चाहिए

Dushyant Kumar

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