उस को शहर की सड़कें अच्छी लगती हैं मेरा क्या है मुझ को चलना पड़ता है
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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क्या ख़बर कौन था वो, और मेरा क्या लगता था जिस सेे मिल कर मुझे, हर शख़्स बुरा लगता था
Tehzeeb Hafi
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माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख
Allama Iqbal
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ये मोहब्बत भी किन दिनों में हुई दिल मिलाने थे हाथ से भी गए
Kafeel Rana
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तुम को तो बस हुस्न के नंबर मिलते हैं उस का सोचो जिस को पढ़ना पड़ता है
Kafeel Rana
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कोई भी उस को जीत नहीं पाया अब तक वैसे वो हर एक को मौक़ा देती है
Kafeel Rana
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अपनी बाँहो से क्यूँँ हटाऊँ उसे सो रहा है तो क्यूँँ जगाऊँ उसे जो भी मिलता है उस का पूछता है यार किस किस से मैं छुपाऊँ उसे
Kafeel Rana
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आँख आँसू को ऐसे रस्ता देती है जैसे रेत गुज़रने दरिया देती है कोई भी उस को जीत नहीं पाया अब तक वैसे वो हर एक को मौक़ा देती है
Kafeel Rana
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