अपनी बाँहो से क्यूँँ हटाऊँ उसे सो रहा है तो क्यूँँ जगाऊँ उसे जो भी मिलता है उस का पूछता है यार किस किस से मैं छुपाऊँ उसे
Related Sher
ज़िंदगी किस तरह बसर होगी दिल नहीं लग रहा मोहब्बत में
Jaun Elia
161 likes
जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है
Shabeena Adeeb
368 likes
मैं अगर अपनी जवानी के सुना दूँ क़िस्से ये जो लौंडे हैं मेरे पाँव दबाने लग जाए
Mehshar Afridi
136 likes
कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
354 likes
तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
339 likes
More from Kafeel Rana
ये मोहब्बत भी किन दिनों में हुई दिल मिलाने थे हाथ से भी गए
Kafeel Rana
36 likes
तुम को तो बस हुस्न के नंबर मिलते हैं उस का सोचो जिस को पढ़ना पड़ता है
Kafeel Rana
41 likes
दूर इक सितारा है और वो हमारा है आँख तक नहीं लगती कोई इतना प्यारा है छू के देखना उस को क्या अजब नज़ारा है तीर आते रहते थे फूल किस ने मारा है
Kafeel Rana
43 likes
उस को शहर की सड़कें अच्छी लगती हैं मेरा क्या है मुझ को चलना पड़ता है
Kafeel Rana
37 likes
जो कहता है वैसे करना पड़ता है इतना प्यारा है कि डरना पड़ता है आँखें काली कर देता है उस का दुख सब को ये जुर्माना भरना पड़ता है
Kafeel Rana
53 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Kafeel Rana.
Similar Moods
More moods that pair well with Kafeel Rana's sher.







