उस ने महफ़िल से उठाया हम को जिस को पलकों पे बिठाया हम ने
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अब इन जले हुए जिस्मों पे ख़ुद ही साया करो तुम्हें कहा था बता कर क़रीब आया करो मैं उस के बा'द महिनों उदास रहता हूँ मज़ाक में भी मुझे हाथ मत लगाया करो
Tehzeeb Hafi
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सारी रात लगाकर उसपर नज़्म लिखी और उस ने बस अच्छा लिखकर भेजा है
Zahid Bashir
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साल के आख़िरी दिन उस ने दिया वक़्त हमें अब तो ये साल कई साल नहीं गुज़रेगा
Shariq Kaifi
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रंग-ओ-रस की हवस और बस मसअला दस्तरस और बस यूँँ बुनी हैं रगें जिस्म की एक नस टस से मस और बस
Ammar Iqbal
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इक नज़ाकत से मुझे उस ने पागल बोला जब मैं ने चूम लिया प्यार से उस के लब को
Parwez Akhtar
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अभी रोने दो शम्ओं को मत रोको ये परवाने का मातम कर रही हैं
Vishal Bagh
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उम्र ये मेरी सिर्फ़ लबादा मेरे ख़द ओ ख़ाल का है मेरा दिल तो मुश्किल से कुछ सोलह सत्रह साल का है!
Vishal Bagh
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मेरे सय्याद को कोई बुला दे मेरे पिंजरे को तोडा जा रहा है
Vishal Bagh
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उस की तस्वीर बंद आँखों से पहले बनती थी अब नहीं बनती
Vishal Bagh
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दुआए माँगते हैं इसीलिए अपने उजड़ने की हमें तो यार तेरे हाथ से तामीर होना हैं
Vishal Bagh
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