अभी रोने दो शम्ओं को मत रोको ये परवाने का मातम कर रही हैं
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इक लड़का शब्दों का जाल बिछाता है और इक लड़की ख़्वाब पिरोने लगती है
Siddharth Saaz
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इस दौर-ए-सियासत का इतना सा फ़साना है बस्ती भी जलानी है मातम भी मनाना है
Unknown
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ज़रा सा वक़्त जो बदला तो हम पे हँसने लगे हमारे काँधे पे सर रख के रोने वाले लोग
Kashif Sayyed
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उड़ने दो परिंदों को अभी शोख़ हवा में फिर लौट के बचपन के ज़माने नहीं आते
Bashir Badr
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वक़्त अच्छा भी आएगा 'नासिर' ग़म न कर ज़िंदगी पड़ी है अभी
Nasir Kazmi
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दुआए माँगते हैं इसीलिए अपने उजड़ने की हमें तो यार तेरे हाथ से तामीर होना हैं
Vishal Bagh
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आज फिर कुफ़्र कमाया हम ने शोर को शे'र सुनाया हम ने
Vishal Bagh
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उम्र ये मेरी सिर्फ़ लबादा मेरे ख़द ओ ख़ाल का है मेरा दिल तो मुश्किल से कुछ सोलह सत्रह साल का है!
Vishal Bagh
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मेरे सय्याद को कोई बुला दे मेरे पिंजरे को तोडा जा रहा है
Vishal Bagh
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उस ने महफ़िल से उठाया हम को जिस को पलकों पे बिठाया हम ने
Vishal Bagh
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