उस पे हम चीख़ ही नहीं सकते उस की चुप्पी कमाल करती है!
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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कोई इतना प्यारा कैसे हो सकता है फिर सारे का सारा कैसे हो सकता है तुझ सेे जब मिल कर भी उदासी कम नहीं होती तेरे बग़ैर गुज़ारा कैसे हो सकता है
Jawwad Sheikh
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ज़िन्दाबाद करो उस आशिक़ का जो ज़ंजीरों में भी हँस कर बोल रहा पायल की छम छम ज़िन्दाबाद रहे
Atul K Rai
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जड़ें कैसे जमानी है नए को सीखने ख़ातिर बग़ीचे में पुराने पेड़ का होना ज़रूरी है
Atul K Rai
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डूब जाने की कला को सीखने के दरमियाँ छटपटाहट ने हुनर तैराक वाला दे दिया
Atul K Rai
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आँसू चाट रहे हैं अब की तिश्ना-लब हाँ ये बात अलग है दरिया दूर नहीं
Atul K Rai
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वो क़ुर्बां कर चुके थे पंख इक दूजे की ख़ातिर हवा में इस लिए दोनों बराबर उड़ रहे थे
Atul K Rai
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