वो क़ुर्बां कर चुके थे पंख इक दूजे की ख़ातिर हवा में इस लिए दोनों बराबर उड़ रहे थे
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ज़ेहन से यादों के लश्कर जा चुके वो मेरी महफ़िल से उठ कर जा चुके मेरा दिल भी जैसे पाकिस्तान है सब हुकूमत कर के बाहर जा चुके
Tehzeeb Hafi
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तरीक़े और भी हैं इस तरह परखा नहीं जाता चराग़ों को हवा के सामने रक्खा नहीं जाता मोहब्बत फ़ैसला करती है पहले चंद लम्हों में जहाँ पर इश्क़ होता है वहाँ सोचा नहीं जाता
Abrar Kashif
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कुछ तो हवा भी सर्द थी कुछ था तिरा ख़याल भी दिल को ख़ुशी के साथ साथ होता रहा मलाल भी
Parveen Shakir
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चराग़ों को उछाला जा रहा है हवा पर रौब डाला जा रहा है
Rahat Indori
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इस नदी की धार में ठंडी हवा आती तो है नाव जर्जर ही सही, लहरों से टकराती तो है
Dushyant Kumar
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ज़िन्दाबाद करो उस आशिक़ का जो ज़ंजीरों में भी हँस कर बोल रहा पायल की छम छम ज़िन्दाबाद रहे
Atul K Rai
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उस पे हम चीख़ ही नहीं सकते उस की चुप्पी कमाल करती है!
Atul K Rai
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ज़रा सी देर उठने में हुई क्या लगे सब पाँव दक्षिण ओर करने
Atul K Rai
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ये कैसी कश्मकश है कैसे किसे बताएँ रोना भी आ रहा है रो भी न पा रहा हूँ
Atul K Rai
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चलेंगे आख़िरी तक साथ कहते हैं बहुत लेकिन बहुत कम लोग हैं जो आख़िरी तक साथ चलते हैं
Atul K Rai
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