जड़ें कैसे जमानी है नए को सीखने ख़ातिर बग़ीचे में पुराने पेड़ का होना ज़रूरी है
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पागल कैसे हो जाते हैं देखो ऐसे हो जाते हैं
Ali Zaryoun
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तुझे कैसे इल्म न हो सका बड़ी दूर तक ये ख़बर गई तिरे शहर ही की ये शाएरा तिरे इंतिज़ार में मर गई
Mumtaz Naseem
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कितने ऐश से रहते होंगे कितने इतराते होंगे जाने कैसे लोग वो होंगे जो उस को भाते होंगे
Jaun Elia
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बीच भँवर से कश्ती कैसे बच निकली बहुत दिनों तक दरिया भी हैरान रहा
Madan Mohan Danish
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तेरे दर पर तेरी ख़ातिर बता ना हमें रोना पड़े, अच्छा लगेगा?
Atul K Rai
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ज़रा सी देर उठने में हुई क्या लगे सब पाँव दक्षिण ओर करने
Atul K Rai
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उस पे हम चीख़ ही नहीं सकते उस की चुप्पी कमाल करती है!
Atul K Rai
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ज़िन्दाबाद करो उस आशिक़ का जो ज़ंजीरों में भी हँस कर बोल रहा पायल की छम छम ज़िन्दाबाद रहे
Atul K Rai
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हम सेे पूछो हँसने की कीमत साहब, चुप्पी ओढ़े घण्टों रोना पड़ता है!
Atul K Rai
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नदी उस पार के साथी अकेले रो रहे होंगे निकल लेते हैं चल भाई अभी सब सो रहे होंगे बिछड़ने के दुखों पर ये ख़ुशी मरहम लगाएगी जो पागल कह रहे थे अब वो पागल हो रहे होंगे
Atul K Rai
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