नदी उस पार के साथी अकेले रो रहे होंगे निकल लेते हैं चल भाई अभी सब सो रहे होंगे बिछड़ने के दुखों पर ये ख़ुशी मरहम लगाएगी जो पागल कह रहे थे अब वो पागल हो रहे होंगे
Related Sher
शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
435 likes
कितने ऐश से रहते होंगे कितने इतराते होंगे जाने कैसे लोग वो होंगे जो उस को भाते होंगे
Jaun Elia
206 likes
इलाज अपना कराते फिर रहे हो जाने किस किस से मोहब्बत कर के देखो ना मोहब्बत क्यूँँ नहीं करते
Farhat Ehsaas
124 likes
उस के होंटों पे रख के होंट अपने बात ही हम तमाम कर रहे हैं
Jaun Elia
128 likes
साल के तीन सौ पैंसठ दिन में एक भी रात नहीं है उस की वो मुझे छोड़ दे और ख़ुश भी रहे इतनी औक़ात नहीं है उस की
Muzdum Khan
69 likes
More from Atul K Rai
ज़िन्दाबाद करो उस आशिक़ का जो ज़ंजीरों में भी हँस कर बोल रहा पायल की छम छम ज़िन्दाबाद रहे
Atul K Rai
0 likes
कहानी किस दिशा में जा रही है सभी किरदार मारे जा रहे हैं
Atul K Rai
0 likes
उस पे हम चीख़ ही नहीं सकते उस की चुप्पी कमाल करती है!
Atul K Rai
0 likes
नई पीढ़ी को आख़िर कौन कल रस्ता दिखाएगा बग़ीचे में पुराने पेड़ का होना ज़रूरी है
Atul K Rai
0 likes
नया पंचाँग टँग जाएगा घर में गुज़रते ही पुराना साल प्यारे
Atul K Rai
0 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Atul K Rai.
Similar Moods
More moods that pair well with Atul K Rai's sher.







