कहानी किस दिशा में जा रही है सभी किरदार मारे जा रहे हैं
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा
Allama Iqbal
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सब विदाई के वक़्त रोते हैं सोच उस वक़्त हँस रहा था मैं
Atul K Rai
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बहारें हों या वीरानी से सब जंगल गुज़रते हैं रुदन हो हास्य हो सब को बराबर बाँटता है वो
Atul K Rai
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क़र्ज़ लदेगा लड़की के बाबूजी पर बाप मगर लड़के का बेंचा जाएगा
Atul K Rai
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बरखा किए बग़ैर ही बादल चले गए गर्मी से फिर ज़मीन की चमड़ी उधड़ गई
Atul K Rai
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उस की आँखों में इतनी गहराई थी पानी होता तो हम डूब गए होते
Atul K Rai
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