उतर रहे हैं कुछ किरदार मिरे दिल से धीरे धीरे बदल रहे हैं कुछ जाहिल में काबिल से धीरे धीरे
Related Sher
कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
521 likes
ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
484 likes
बंसी सब सुर त्यागे है, एक ही सुर में बाजे है हाल न पूछो मोहन का, सब कुछ राधे राधे है
Zubair Ali Tabish
325 likes
देखो हम कोई वहशी नहीं दीवाने हैं तुम सेे बटन खुलवाने नहीं लगवाने हैं
Varun Anand
300 likes
रातें किसी याद में कटती हैं और दिन दफ़्तर खा जाता है दिल जीने पर माएल होता है तो मौत का डर खा जाता है सच पूछो तो 'तहज़ीब हाफ़ी' मैं ऐसे दोस्त से आज़िज़ हूँ मिलता है तो बात नहीं करता और फोन पे सर खा जाता है
Tehzeeb Hafi
307 likes
More from Sandeep dabral 'sendy'
ये क़ल्ब कहाँ रह पाता है तब काबू में जब बैठा करती है वो मेरे बाज़ू में
Sandeep dabral 'sendy'
0 likes
शक होना लाज़िमी है अकारण लगाव पर मरहम यहाँ लगाता न अब कोई घाव पर
Sandeep dabral 'sendy'
0 likes
वक़्त रहते लौट आना देर तुम सेे हो न जाए बा'द में हो वक़्त ज़्यादा पर कहीं हम हों न जग में
Sandeep dabral 'sendy'
0 likes
तुम जिस के साथ देखते हो याँ अपने घर के सपने अक्सर वो लड़की देखा करती है अफ़सर के सपने इक रोज़ हिज्र अपने शबाब पर होगा और पूछो मत तुम देखते रहोगे फिर केवल नामा-बर के सपने
Sandeep dabral 'sendy'
0 likes
वक़्त कहाँ लगता है याँ क्या से क्या होने में जैसे नइँ लगता है याँ, 'है' से 'था' होने में
Sandeep dabral 'sendy'
0 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Sandeep dabral 'sendy'.
Similar Moods
More moods that pair well with Sandeep dabral 'sendy''s sher.







