sherKuch Alfaaz

उतरी हुई नदी को समुंदर कहेगा कौन सत्तर अगर हैं आप बहत्तर कहेगा कौन पपलू से उन की बीवी ने कल रात कह दिया मैं देखती हूँ आप को शौहर कहेगा कौन

More from Paplu Lucknawi

मैं क्या करूँँ मेरी बेगम सुहाग ढूँढ़े है मेरे बुझे हुए चूल्हे में आग ढूँढ़े है वो दिन गए कि उड़ाते थे फ़ाख़्ताएँ हम सपेरा चूहे के इक बिल में नाग ढूँढ़े है

Paplu Lucknawi

14 likes

खद्दर पहन के बेच रहा था शराब वो देखा मुझे तो हाथ में झंडा उठा लिया मैं भी कोई गँवार सिपाही न था जनाब मैं ने भी जाम फेंक के डंडा उठा लिया

Paplu Lucknawi

23 likes

न तेरे आने से मेरा शबाब लौटा है न दिल लगाने से मेरा शबाब लौटा है क़सम ख़ुदा की बताता हूँ राज़ ये तुम को नहारी खाने से मेरा शबाब लौटा है

Paplu Lucknawi

23 likes

पैसा कमाने आते हैं सब राजनीति में आता नहीं है कोई भी खोने के वास्ते छम्मो का मुजरा सुनते हैं नेता जो रात भर संसद भवन में आते हैं सोने के वास्ते

Paplu Lucknawi

26 likes

मुत्तकी हो गया ख़ौफ़-ए-बीवी से मैं अब इबादत का सौदा मेरे सर में है मैं ने दाढ़ी बढ़ाई तो कहने लगी अब कमीना ये हूरों के चक्कर में है

Paplu Lucknawi

18 likes

Similar Writers

View All ›

Our suggestions based on Paplu Lucknawi.

Similar Moods

View All ›

More moods that pair well with Paplu Lucknawi's sher.