wae ghurbat ki hue jis ke liye khana-kharab sun ke aawaz bhi ghar se na wo bahar nikla
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अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख़्वाबों में मिलें जिस तरह सूखे हुए फूल किताबों में मिलें
Ahmad Faraz
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तेरी आँखों में जो इक क़तरा छुपा है, मैं हूँ जिस ने छुप छुप के तेरा दर्द सहा है, मैं हूँ एक पत्थर कि जिसे आँच न आई, तू है एक आईना कि जो टूट चुका है, मैं हूँ
Fauziya Rabab
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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तेरी निगाह-ए-नाज़ से छूटे हुए दरख़्त मर जाएँ क्या करें बता सूखे हुए दरख़्त हैरत है पेड़ नीम के देने लगे हैं आम पगला गए हैं आप के चू में हुए दरख़्त
Varun Anand
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कोई शहर था जिस की एक गली मेरी हर आहट पहचानती थी मेरे नाम का इक दरवाज़ा था इक खिड़की मुझ को जानती थी
Ali Zaryoun
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फिर चाहे तो न आना ओ आन बान वाले झूटा ही वअ'दा कर ले सच्ची ज़बान वाले
Arzoo Lakhnavi
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आरज़ू' जाम लो झिजक कैसी पी लो और दहशत-ए-गुनाह गई
Arzoo Lakhnavi
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मोहब्बत वहीं तक है सच्ची मोहब्बत जहाँ तक कोई अहद-ओ-पैमाँ नहीं है
Arzoo Lakhnavi
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फिर चाहे तो न आना ओ आन बान वाले झूटा ही वअ'दा कर ले सच्ची ज़बान वाले
Arzoo Lakhnavi
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मोहब्बत नेक-ओ-बद को सोचने दे ग़ैर-मुमकिन है बढ़ी जब बे-ख़ुदी फिर कौन डरता है गुनाहों से
Arzoo Lakhnavi
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