वा'दे कर के जो छोड़ चले आधे रस्ते में उन के पीछे नंगे पा दौड़ नहीं सकते हम
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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वो अफ़्साना जिसे अंजाम तक लाना न हो मुमकिन उसे इक ख़ूब-सूरत मोड़ दे कर छोड़ना अच्छा
Sahir Ludhianvi
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हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा
Allama Iqbal
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मेहरबाँ हम पे हर इक रात हुआ करती थी आँख लगते ही मुलाक़ात हुआ करती थी हिज्र की रात है और आँख में आँसू भी नहीं ऐसे मौसम में तो बरसात हुआ करती थी
Ismail Raaz
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तूफ़ानों से आँख मिलाओ सैलाबों पे वार करो मल्लाहों का चक्कर छोड़ो तैर के दरिया पार करो
Rahat Indori
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ये क़ल्ब कहाँ रह पाता है तब काबू में जब बैठा करती है वो मेरे बाज़ू में
Sandeep dabral 'sendy'
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ये मानो न मानो यहाँ अपना कल सुन रहा है ये पढ़ने की इस उम्र में जो ग़ज़ल सुन रहा है
Sandeep dabral 'sendy'
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वो भी नेताओं के जैसी निकली वादे उस के सभी जुमले हो गए
Sandeep dabral 'sendy'
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वक़्त रहते लौट आना देर तुम सेे हो न जाए बा'द में हो वक़्त ज़्यादा पर कहीं हम हों न जग में
Sandeep dabral 'sendy'
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वो छोड़ गया है साथ हमारा कर के नम आँखें कि हिफ़ाज़त जिस की गाहे करती थी हर-दम आँखें
Sandeep dabral 'sendy'
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