वक़्त मिरे हिस्से की मिट्टी खींच गया गर्द से और धुएँ से मुझ को सींच गया मैं खिलता भी तो क्या खिलता आँगन में वो ज़ालिम हस्ती भी मेरी भींच गया
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वक़्त रहता नहीं कहीं टिक कर आदत इस की भी आदमी सी है
Gulzar
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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वो ज़माना गुज़र गया कब का था जो दीवाना मर गया कब का
Javed Akhtar
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मुझ से मत पूछो के उस शख़्स में क्या अच्छा है अच्छे अच्छों से मुझे मेरा बुरा अच्छा है किस तरह मुझ से मुहब्बत में कोई जीत गया ये न कह देना के बिस्तर में बड़ा अच्छा है
Tehzeeb Hafi
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हम अपनी जान के दुश्मन को अपनी जान कहते हैं मोहब्बत की इसी मिट्टी को हिंदुस्तान कहते हैं
Rahat Indori
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किस तरह पूछूँ वो कहाँ है कैसा है अब माँ की बातें शोर लगती हैं उसे
Sanjay Bhat
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कहाँ ऐसे मरासिम थे कि कोई लौट के आता ख़िज़ाँ के फूल को ख़ूँ की नहीं अश्कों की हाजत थी
Sanjay Bhat
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ये रंगीन आँचल ये पुर नूर चेहरा खनक पायलों की ये चूड़ी का घेरा जहाँ तक भी देखो है ख़ुशबू तुम्हारी तुम्हारी चमक से है दिल में सवेरा
Sanjay Bhat
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ये किस तरह की मय-कशी है कौन सा इलाज है तुम्हें दवा भी चाहिए तो ज़हर के लिबास में
Sanjay Bhat
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वो दिल से हो कर आँख से उतर गया इक आँसू था जो उम्र से गुज़र गया
Sanjay Bhat
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