वो दुल्हन बन के रुख़्सत हो गई है कहाँ तक कार का पीछा करोगे?
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किताब फ़िल्म सफ़र इश्क़ शा'इरी औरत कहाँ कहाँ न गया ख़ुद को ढूँढ़ता हुआ मैं
Jawwad Sheikh
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शतक बनाने को बस एक रन बनाना है वो दोस्त बन गई है अब दुल्हन बनाना है
Charagh Sharma
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वाक़िफ़ कहाँ ज़माना हमारी उड़ान से वो और थे जो हार गए आसमान से
Faheem Jogapuri
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मैं साँसें तक लुटा सकता हूँ उस के इक इशारे पर मगर वो मेरे हर वादे को सरकारी समझता है
Rahat Indori
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मत पूछो कितना ग़मगीं हूँ गंगा जी और जमुना जी ज़्यादा तुम को याद नहीं हूँ गंगा जी और जमुना जी अमरोहे में बान नदी के पास जो लड़का रहता था अब वो कहाँ है मैं तो वहीं हूँ गंगा जी और जमुना जी
Jaun Elia
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आइना कब बनाओगे मुझ को मुझ से किस दिन मिलाओगे मुझ को
Zubair Ali Tabish
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कोई तितली निशाने पर नहीं है मैं बस रंगों का पीछा कर रहा हूँ
Zubair Ali Tabish
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अब तलक उस को ध्यान हो मेरा क्या पता ये गुमान हो मेरा
Zubair Ali Tabish
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चूड़ियाँ बेच के वो मेरे लिए लाई 'गिटार' तार छेड़ूँ तो खनकने की सदा आती है
Zubair Ali Tabish
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जहाँ तक आके तुम वापस गए हो वहाँ अब तक कोई पहुँचा नहीं है
Zubair Ali Tabish
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