वो इंसाॅं कैसे हो सकता जिसे इंसाॅं से नफ़रत है वो मज़हब क्या न जिस में बाइस-ए-अम्न-ओ-मोहब्बत है कहाँ जन्नत मिलेगी उन को जो हैं अम्न के क़ातिल ये मासूमों पे हैबत किस पयम्बर वाली उम्मत है
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कोई इतना प्यारा कैसे हो सकता है फिर सारे का सारा कैसे हो सकता है तुझ सेे जब मिल कर भी उदासी कम नहीं होती तेरे बग़ैर गुज़ारा कैसे हो सकता है
Jawwad Sheikh
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तुम सेे मिल कर इतनी तो उम्मीद हुई है इस दुनिया में वक़्त बिताया जा सकता है
Manoj Azhar
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वो अफ़्साना जिसे अंजाम तक लाना न हो मुमकिन उसे इक ख़ूब-सूरत मोड़ दे कर छोड़ना अच्छा
Sahir Ludhianvi
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तुम ने छोड़ा तो किसी और से टकराऊँगा मैं कैसे मुमकिन है कि अंधे का कहीं सर न लगे
Umair Najmi
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कितने ऐश से रहते होंगे कितने इतराते होंगे जाने कैसे लोग वो होंगे जो उस को भाते होंगे
Jaun Elia
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वादों से मुकर जाना तो फ़ितरत है तुम्हारी कुछ और नया खेल दिखाओ तो बने बात
Nityanand Vajpayee
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मिलो जब भी कभी जाहिल से तो ख़ामोश रहिए आप मियाँ जाहिल को आलिम से अजब तकलीफ़ होती है
Nityanand Vajpayee
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मेरी कश्ती से तूफ़ानों का जाने क्या रिश्ता है ज्यूँँ ही धारों में उतरेगी तूफ़ाँ मिलने आएगा
Nityanand Vajpayee
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हैं नहीं दुनिया में जिन के बाक़ियातुस्सालिहात कौन उन के फ़ातिहा में आएँगे बन कर हुजूम
Nityanand Vajpayee
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हम को झूठे ख़्वाबों की सौग़ात न देना हम को वाक़ई में ख़ुद की औक़ात पता है
Nityanand Vajpayee
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