वो नशा है के ज़बाँ अक़्ल से करती है फ़रेब तू मिरी बात के मफ़्हूम पे जाता है कहाँ
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ये जो मैं होश में रहता नहीं तुम सेे मिल कर ये मिरा इश्क़ है तुम इस को नशा मत समझो
Shakeel Azmi
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या रब मिरी दु'आओं में इतना असर रहे फूलों भरा सदा मिरी बहना का घर रहे
Unknown
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मुझे आँखें दिखा कर बोलती है चुप रहो भैया बहिन छोटी भले हो बात वो अम्मा सी करती है
Divy Kamaldhwaj
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धूप भी आराम करती थी जहाँ अपना ऐसी छाँव से नाता रहा
Madan Mohan Danish
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कोई चादर वफ़ा नहीं करती वक़्त जब खींच-तान करता है
Unknown
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हमारा काम तो मौसम का ध्यान करना है और उस के बा'द के सब काम शश-जहात के हैं
Pallav Mishra
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ये जिस्म तंग है सीने में भी लहू कम है दिल अब वो फूल है जिस में कि रंग-ओ-बू कम है
Pallav Mishra
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तमाम होश ज़ब्त इल्म मस्लहत के बा'द भी फिर इक ख़ता मैं कर गया था माज़रत के बा'द भी
Pallav Mishra
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तमाम फ़र्क़ मोहब्बत में एक बात के हैं वो अपनी ज़ात का नईं है हम उस की ज़ात के हैं
Pallav Mishra
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मैं तुझ सेे मिलने समय से पहले पहुँच गया था सो तेरे घर के क़रीब आ कर भटक रहा हूँ
Pallav Mishra
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