धूप भी आराम करती थी जहाँ अपना ऐसी छाँव से नाता रहा
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कुछ न रह सका जहाँ विरानियाँ तो रह गईं तुम चले गए तो क्या कहानियाँ तो रह गईं
Khalil Ur Rehman Qamar
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इक कली की पलकों पर सर्द धूप ठहरी थी इश्क़ का महीना था हुस्न की दुपहरी थी ख़्वाब याद आते हैं और फिर डराते हैं जागना बताता है नींद कितनी गहरी थी
Vikram Gaur Vairagi
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जहान भर में न हो मुयस्सर जो कोई शाना, हमें बताना नहीं मिले गर कोई ठिकाना तो लौट आना, हमें बताना कुछ ऐसी बातें जो अनकही हों, मगर वो अंदर से खा रही हों लगे किसी को बताना है पर नहीं बताना, हमें बताना
Vikram Gaur Vairagi
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सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्ताँ हमारा हम बुलबुलें हैं इस की ये गुलसिताँ हमारा
Allama Iqbal
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ग़म और ख़ुशी में फ़र्क़ न महसूस हो जहाँ मैं दिल को उस मक़ाम पे लाता चला गया
Sahir Ludhianvi
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अपनी दुनिया भी चल पड़े शायद इक रुका फ़ैसला किया जाए
Madan Mohan Danish
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वरना बे-मौत ही मर जाएँगे सारे किरदार एक इनकार ज़रूरी है कहानी के लिए
Madan Mohan Danish
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कुछ भी आसान न था पहले भी फिर भी हम खुल के हँसा करते थे
Madan Mohan Danish
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क्यूँँ ज़रूरी है किसी के पीछे पीछे हम चलें जब सफ़र अपना है तो अपनी रवानी चाहिए
Madan Mohan Danish
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मुसलसल तजरबों का है नतीजा मैं दरया से किनारा हो गया हूँ
Madan Mohan Danish
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