वो तो सब बातों पर अब एहसान जताया करता है ख़ातिर जिस की मैं ख़ुद को आबाद बताया करता था
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बिठा दिया है सिपाही के दिल में डर उस ने तलाशी दी है दुपट्टा उतार कर उस ने मैं इस लिए भी उसे ख़ुद-कुशी से रोकता हूँ लिखा हुआ है मेरा नाम जिस्म पर उस ने
Zia Mazkoor
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बात ही कब किसी की मानी है अपनी हठ पूरी कर के छोड़ोगी ये कलाई ये जिस्म और ये कमर तुम सुराही ज़रूर तोड़ोगी
Jaun Elia
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अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख़्वाबों में मिलें जिस तरह सूखे हुए फूल किताबों में मिलें
Ahmad Faraz
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मिले किसी से गिरे जिस भी जाल पर मेरे दोस्त मैं उस को छोड़ चुका उस के हाल पर मेरे दोस्त ज़मीं पे सबका मुक़द्दर तो मेरे जैसा नहीं किसी के साथ तो होगा वो कॉल पर मेरे दोस्त
Ali Zaryoun
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करता नहीं ख़याल तेरा इस ख़याल से तंग आ गया अगर तू मेरी देखभाल से चल मेरे साथ और तबीयत की फ़िक्र छोड़ दो मील दूर है मेरा घर अस्पताल से
Tehzeeb Hafi
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वो तुम सेे दूर कैसा है ये तुम भी सोच कर देखो वो जैसे नोचता है बाल तुम भी नोच कर देखो
Kushal "PARINDA"
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ज़बाँ पर आ गई हर बात जो मन में दबाई थी मेरे इस दिल की ख़ामोशी ने मुझ को तोड़ डाला है
Kushal "PARINDA"
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मुझे तुम सेे मोहब्बत है इधर देखो न तुम जाना तुझे पाने कि ख़ातिर हर जगह मिटकर खड़े हैं हम
Kushal "PARINDA"
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जाने क्यूँ वो मुझे बदनाम किया करते थे क्यूँ मोहब्बत मेरी नीलाम किया करते थे
Kushal "PARINDA"
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लोग मिलते हैं मगर दिल नहीं मिल पाते हैं हर मुलाक़ात में कुछ फ़ासला भर होता है
Kushal "PARINDA"
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