वो उधर फूलों की सेज पर है ज़िन्दगी आख़िरी स्टेज पर है बात जो सखियाँ करवा रही थीं उन का भी फोन इंगेज पर है
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क्यूँ डरें ज़िन्दगी में क्या होगा कुछ न होगा तो तजरबा होगा
Javed Akhtar
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अचानक ही परीक्षा ज़िन्दगी ने ली रिवीजन भी नहीं करने दिया मुझ को
Rohit Gustakh
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सब लोग जिधर वो हैं उधर देख रहे हैं हम देखने वालों की नज़र देख रहे हैं
Dagh Dehlvi
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लौट जाती है उधर को भी नज़र क्या कीजे अब भी दिलकश है तेरा हुस्न मगर क्या कीजे
Faiz Ahmad Faiz
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जो नासमझ हैं उठाते हैं ज़िन्दगी के मज़े समझने वाले तो बस उम्र भर समझते हैं
Amit Bajaj
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रोज़ बदलता है स्टोरी अपनी वो हर तस्वीर हिफ़ाज़त से रक्खी है
Sachin Sharma
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ज़िन्दगी को हम से मिलवा दीजिए उस को जीने के तरीके सिखला दे
Sachin Sharma
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शब्दों को जोड़ कर के मिसरा बनाता हूँ मैं ऊँचे पहाड़ों को भी तिनका बनाता हूँ मैं इंजीनियर को आता है काम ये भी करना तिरछी डगर पे सीधा रस्ता बनाता हूँ मैं
Sachin Sharma
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वो किस को चाहती है और किस सेे प्रेम करती है मुहब्बत में कोई तुक्का कभी आसाँ नहीं होता
Sachin Sharma
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लगता है बद-तमीज़ को भी आने लग गए उस्ताद हम से शे'र सुधरवाने लग गए
Sachin Sharma
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