वो किस को चाहती है और किस सेे प्रेम करती है मुहब्बत में कोई तुक्का कभी आसाँ नहीं होता
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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क्या ख़बर कौन था वो, और मेरा क्या लगता था जिस सेे मिल कर मुझे, हर शख़्स बुरा लगता था
Tehzeeb Hafi
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ले दे के अपने पास फ़क़त इक नज़र तो है क्यूँँ देखें ज़िंदगी को किसी की नज़र से हम
Sahir Ludhianvi
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सभी का ख़ून है शामिल यहाँ की मिट्टी में किसी के बाप का हिन्दुस्तान थोड़ी है
Rahat Indori
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मेहरबाँ हम पे हर इक रात हुआ करती थी आँख लगते ही मुलाक़ात हुआ करती थी हिज्र की रात है और आँख में आँसू भी नहीं ऐसे मौसम में तो बरसात हुआ करती थी
Ismail Raaz
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तुझे देखना है क़रीब से तू जो पास आ के यूँँ बैठ जा तिरे होंठ सुर्ख़ गुलाब हैं तो गुलाब को अभी चूम लूँ
Sachin Sharma
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वो उधर फूलों की सेज पर है ज़िन्दगी आख़िरी स्टेज पर है बात जो सखियाँ करवा रही थीं उन का भी फोन इंगेज पर है
Sachin Sharma
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मुझे ढूँढती हैं तुम्हारी ये आँखें मैं जो ढूँढ़ता हूँ वो तुम में नहीं है
Sachin Sharma
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शे'र कहने के न चक्कर में पड़े कुछ नहीं होगा यूँँ बिस्तर में पड़े हो के ग़ुस्से में पिताजी ने कहा तोड़ते हो रोटियाँ घर में पड़े
Sachin Sharma
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शब्दों को जोड़ कर के मिसरा बनाता हूँ मैं ऊँचे पहाड़ों को भी तिनका बनाता हूँ मैं इंजीनियर को आता है काम ये भी करना तिरछी डगर पे सीधा रस्ता बनाता हूँ मैं
Sachin Sharma
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