शे'र कहने के न चक्कर में पड़े कुछ नहीं होगा यूँँ बिस्तर में पड़े हो के ग़ुस्से में पिताजी ने कहा तोड़ते हो रोटियाँ घर में पड़े
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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किसी गली में किराए पे घर लिया उस ने फिर उस गली में घरों के किराए बढ़ने लगे
Umair Najmi
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो
Jaun Elia
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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ज़िन्दगी को हम से मिलवा दीजिए उस को जीने के तरीके सिखला दे
Sachin Sharma
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वो किस को चाहती है और किस सेे प्रेम करती है मुहब्बत में कोई तुक्का कभी आसाँ नहीं होता
Sachin Sharma
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पहले ही मिसरे में आप याद आ गए और ग़ज़ल ये धरी की धरी रह गई
Sachin Sharma
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ख़ज़ाना चाहते हो और मुश्किल भी नहीं कोई ख़ज़ाना का कोई नक़्शा कभी आसाँ नहीं होता
Sachin Sharma
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ख़ुदा की क़सम बाग़ी हो जाएँगे मोहब्बत में हम बाग़ी हो जाएँगे अगर ख़ुशियाँ ज़्यादा दिनों तक रही तो मेरे ये ग़म बाग़ी हो जाएँगे
Sachin Sharma
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