ज़िन्दगी को हम से मिलवा दीजिए उस को जीने के तरीके सिखला दे
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मैं समझा था तुम हो तो क्या और माँगू मेरी ज़िन्दगी में मेरी आस तुम हो ये दुनिया नहीं है मेरे पास तो क्या मेरा ये भरम था मेरे पास तुम हो
Khalil Ur Rehman Qamar
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ये मत भूलो कि ये लम्हात हम को बिछड़ने के लिए मिलवा रहे हैं
Jaun Elia
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जो नासमझ हैं उठाते हैं ज़िन्दगी के मज़े समझने वाले तो बस उम्र भर समझते हैं
Amit Bajaj
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क़ुबूल है जिन्हें ग़म भी तेरी ख़ुशी के लिए वो जी रहे हैं हक़ीक़त में ज़िन्दगी के लिए
Nasir Kazmi
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जो गुज़ारी न जा सकी हम से हम ने वो ज़िन्दगी गुज़ारी है
Jaun Elia
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वो उधर फूलों की सेज पर है ज़िन्दगी आख़िरी स्टेज पर है बात जो सखियाँ करवा रही थीं उन का भी फोन इंगेज पर है
Sachin Sharma
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वो किस को चाहती है और किस सेे प्रेम करती है मुहब्बत में कोई तुक्का कभी आसाँ नहीं होता
Sachin Sharma
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शे'र कहने के न चक्कर में पड़े कुछ नहीं होगा यूँँ बिस्तर में पड़े हो के ग़ुस्से में पिताजी ने कहा तोड़ते हो रोटियाँ घर में पड़े
Sachin Sharma
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मुझ पर लिखेगा तो हो जाएगा तू भी बदनाम, यार बेहतर है आदत डाल ले अब तू भी ग़ज़लें कहने की
Sachin Sharma
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शे'र हल्के हैं ये मेरे भारी पड़ते हैं ये लेकिन
Sachin Sharma
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