वो उस्ताद है या फ़ाज़िल लगता है वो ही शख़्स मुझ को क़ाबिल लगता है हिम्मत बाँध कर आया हूँ मैं वरना पहले-पहल मिलना मुश्किल लगता है
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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क्या ख़बर कौन था वो, और मेरा क्या लगता था जिस सेे मिल कर मुझे, हर शख़्स बुरा लगता था
Tehzeeb Hafi
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तेरी ख़ुशियों का सबब यार कोई और है ना दोस्ती मुझ सेे है और प्यार कोई और है ना
Ali Zaryoun
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बातें नहीं करनी मुझे यार फिर भी उस शख़्स ने बातों में उलझा रखा है
Rudransh Trigunayat
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झूठ बोले वो मिरा यार नहीं हो सकता चाहकर भी तो नया प्यार नहीं हो सकता मैं अकेला हूँ बहुत मुझ पे है ज़िम्मेदारी काम हर इक तिरे अनुसार नहीं हो सकता
Rudransh Trigunayat
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दस्त सींचा हाथ से इक पेड़ पर फल है नहीं अब तुम्हें हम क्या बताएँ क्या परेशानी हुई
Rudransh Trigunayat
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मैं रुठूगा कोई मुझे मनायेगा नहीं ये मेरा ग़म उस को कभी सतायेगा नहीं
Rudransh Trigunayat
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उस ने इतना सँभाल कर रखा है मुझ को पल्लू सा डाल कर रखा है
Rudransh Trigunayat
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