sherKuch Alfaaz

वाहिद जमा में और मुज़क्कर में फँस गए कुछ क़ाफ़िए अरुज़ के ख़ंजर में फँस गए कुछ में तो रब्त कुछ में मुअन्नस का ऐब था मेरे हसीन शे'र तो चक्कर में फँस गए

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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो

Tehzeeb Hafi

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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा

Ahmad Faraz

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हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो

Jaun Elia

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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा

Tehzeeb Hafi

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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा

Allama Iqbal

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फफोले पड़ चुके आँखों में ज़ौक़-ए-दीद बाक़ी है  बहुत है दूर तू मुझ सेे मगर उम्मीद बाक़ी है  मेरी जाँ लौट के आजा दिल-ए-बीमार की ख़ातिर सभी की हो गई है ईद मेरी ईद बाक़ी है

SALIM RAZA REWA

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जी भर के मुझ को नाच नचा ले तू ज़िंदगी मैं ने भी घुँघरू बाँध लिए अपने पाँव में

SALIM RAZA REWA

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ताल में पंछी पनघट गागर चौपालें कितना सुंदर गाँव का मंज़र होता है टूटा फूटा गिरा पड़ा कुछ तंग सही अपना घर तो अपना ही घर होता है

SALIM RAZA REWA

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ये और बात है कि वो मिलते नहीं मगर किस ने कहा कि उन सेे मेरी दोस्ती नहीं

SALIM RAZA REWA

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टूटा-फूटा गिरा पड़ा कुछ तंग सही 
 अपना घर तो अपना ही घर होता है

 ताल में पंछी पनघट गागर चौपालें 
 कितना सुंदर गाँव का मंज़र होता है

SALIM RAZA REWA

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