वक़्त, वफ़ा, हक़, आँसू, शिकवे जाने क्या क्या माँग रहे थे एक सहूलत के रिश्ते से हम ही ज़्यादा माँग रहे थे उस की आँखें उस की बातें उस के लब वो चेहरा उस का हम उस की हर एक अदास अपना हिस्सा माँग रहे थे
sherKuch Alfaaz
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तू मोहब्बत से कोई चाल तो चल हार जाने का हौसला है मुझे
Ahmad Faraz
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चल गया होगा पता ये आप को बे-वफ़ा कहते हैं लड़के आप को इक ज़रा से हुस्न पर इतनी अकड़ तू समझती क्या है अपने आप को
Kushal Dauneria
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कितने ऐश से रहते होंगे कितने इतराते होंगे जाने कैसे लोग वो होंगे जो उस को भाते होंगे
Jaun Elia
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