वसिय्यत में मिली है दुश्मनी हम को यहाँ साहब नहीं चर्चे थे कम वर्ना हमारी दोस्ती के भी
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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बंसी सब सुर त्यागे है, एक ही सुर में बाजे है हाल न पूछो मोहन का, सब कुछ राधे राधे है
Zubair Ali Tabish
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ऐ ज़माने मुझे यूँँ न बदनाम कर हो सके तो मुझे उन के ही नाम कर
Shivam Mishra
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आइना हूँ टूटा मैं नईं समेटो तुम मुझ को मुंतशिर हो जाओगे यूँँ न देखो तुम मुझ को
Shivam Mishra
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मुसलसल बिन तेरे जीने की राहें ढूँढ़ता था मैं तेरी यादों ने कर के मुस्तक़िल अपना लिया मुझ को
Shivam Mishra
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ज़िन्दगी हमें जब उलझन तमाम देती है मौत चैन का फिर दे इक पयाम देती है
Shivam Mishra
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नींद आती है कम रात में अब मुझे लग रहा है कि मंज़िल क़रीब आ गई
Shivam Mishra
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