नींद आती है कम रात में अब मुझे लग रहा है कि मंज़िल क़रीब आ गई
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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ज़िन्दगी हमें जब उलझन तमाम देती है मौत चैन का फिर दे इक पयाम देती है
Shivam Mishra
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वो मेरा आशियाँ यूँँ सजा के गया जल रही हर शमा' को बुझा के गया
Shivam Mishra
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शख़्स सब हम को अपने ही दिखते रहे बस तभी हम बिना दाम बिकते रहे
Shivam Mishra
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तेरी नज़रें जिसे देख लें इक दफ़ा फिर लगे नइँ दुआ और कोई दवा
Shivam Mishra
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ऐ ज़माने मुझे यूँँ न बदनाम कर हो सके तो मुझे उन के ही नाम कर
Shivam Mishra
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