वो और ज़माना था गाँधी जी भगत जी का ऐसे तो अभी कोई किरदार नहीं दिखते
Related Sher
मेहरबाँ हम पे हर इक रात हुआ करती थी आँख लगते ही मुलाक़ात हुआ करती थी हिज्र की रात है और आँख में आँसू भी नहीं ऐसे मौसम में तो बरसात हुआ करती थी
Ismail Raaz
140 likes
दिल से साबित करो कि ज़िंदा हो साँस लेना कोई सुबूत नहीं
Fahmi Badayuni
139 likes
अगर है इश्क़ सच्चा तो निगाहों से बयाँ होगा ज़बाँ से बोलना भी क्या कोई इज़हार होता है
Bhaskar Shukla
130 likes
देखो हम कोई वहशी नहीं दीवाने हैं तुम सेे बटन खुलवाने नहीं लगवाने हैं
Varun Anand
300 likes
यूँँ जो तकता है आसमान को तू कोई रहता है आसमान में क्या
Jaun Elia
164 likes
More from Sahil Verma
याद है जब कहा करती थी माँ घर आ तेरी मरम्मत करूँँगी
Sahil Verma
0 likes
याद बनकर लिखा होता दिल पे जो भी एक आँसू वो सब कुछ मिटा आता है
Sahil Verma
0 likes
वो लड़का जो तुम्हें कहीं मिल गया है वही जिस पे तुम्हारा ये दिल गया है सखी वो बहुत अच्छा लड़का है मुझ सेे तभी दूर तुम सेे ये साहिल गया है
Sahil Verma
0 likes
ये ग़ज़ल ग़ैर मुसलसल है पर इस में मतला है न ही मक़्ता है
Sahil Verma
1 likes
शब्दों में उतनी अश्लीलता ही नहीं जितनी मन में किसी के ठरक होती है
Sahil Verma
1 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Sahil Verma.
Similar Moods
More moods that pair well with Sahil Verma's sher.







