वो इश्क़ में भी रहते हैं जो होश में कहते हैं झूठ उन को मोहब्बत है नहीं
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क्यूँ डरें ज़िन्दगी में क्या होगा कुछ न होगा तो तजरबा होगा
Javed Akhtar
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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ये फूल तेरे बाग़ के बस नाम के ही फूल हैं तुम खिल रहे हो जैसे वैसे कोई भी खिलता नहीं
Praveen Bhardwaj
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मेरी जाँ कोई ज़ुल्म न कर ख़ुदा के लिए यहाँ कोई ग़ुरूर नहीं रहता सदा के लिए
Praveen Bhardwaj
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तुम को नज़र अंदाज़ करता ज़िंदगी में करता नइँ तुम कर रहे जो इश्क़ में मैं दुश्मनी में करता नइँ
Praveen Bhardwaj
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सबकी अपनी-अपनी मर्ज़ी होती हैं जो यहाँ से अब जैसा चाहें वैसा चुने उस की मर्ज़ी हैं पत्थर को फूल समझे या फिर अपने फूल से बस काँटा चुने
Praveen Bhardwaj
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कोई कब समझता है कितनी दूर है मंज़िल कितना दूर हम सेे हम कितना दूर दिल से दिल
Praveen Bhardwaj
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