वो रूठ कर गया मुझ सेे ऐसे एक दिन की जैसे था ही नहीं वो तो मेरे दस्तरस में
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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क्या ख़बर कौन था वो, और मेरा क्या लगता था जिस सेे मिल कर मुझे, हर शख़्स बुरा लगता था
Tehzeeb Hafi
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देखो हम कोई वहशी नहीं दीवाने हैं तुम सेे बटन खुलवाने नहीं लगवाने हैं
Varun Anand
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कोई शहर था जिस की एक गली मेरी हर आहट पहचानती थी मेरे नाम का इक दरवाज़ा था इक खिड़की मुझ को जानती थी
Ali Zaryoun
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सीख ली मैं ने भी दुनियादारी वर्ना मैं ख़ुद-कुशी से मर जाता
Amit Kumar
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सारे पंछी तो आख़िर में उड़ जाते हैं पेड़ बस देखते पेड़ कटते हुए
Amit Kumar
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ये निशानी रख लो अपनी पास अपने क्या करूँँगा अब मैं इक पुर्ज़ा बचाकर
Amit Kumar
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खोज सबने लिया है मगर ज़िंदगी का कोई हल नहीं
Amit Kumar
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ख़त्म होती ही नहीं ग़म की घड़ी ये क्या मिलेगा हम को ये अर्सा बचाकर
Amit Kumar
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