ये निशानी रख लो अपनी पास अपने क्या करूँँगा अब मैं इक पुर्ज़ा बचाकर
Related Sher
गुलाब ख़्वाब दवा ज़हर जाम क्या क्या है मैं आ गया हूँ बता इंतिज़ाम क्या क्या है
Rahat Indori
263 likes
पूछते हैं वो कि ग़ालिब कौन है कोई बतलाओ कि हम बतलाएँ क्या
Mirza Ghalib
208 likes
हम अपनी जान के दुश्मन को अपनी जान कहते हैं मोहब्बत की इसी मिट्टी को हिंदुस्तान कहते हैं
Rahat Indori
212 likes
कुछ न रह सका जहाँ विरानियाँ तो रह गईं तुम चले गए तो क्या कहानियाँ तो रह गईं
Khalil Ur Rehman Qamar
164 likes
ले दे के अपने पास फ़क़त इक नज़र तो है क्यूँँ देखें ज़िंदगी को किसी की नज़र से हम
Sahir Ludhianvi
174 likes
More from Amit Kumar
सारे पंछी तो आख़िर में उड़ जाते हैं पेड़ बस देखते पेड़ कटते हुए
Amit Kumar
0 likes
अच्छे ख़ासे उदासी में बैठे थे हम कैमरा देख के हम को हँसना पड़ा
Amit Kumar
0 likes
सीख ली मैं ने भी दुनियादारी वर्ना मैं ख़ुद-कुशी से मर जाता
Amit Kumar
0 likes
पहले ज़िंदगी के तुम अजाब देखो फिर गर चाहो तो इस के ख़िताब देखो
Amit Kumar
1 likes
पहले तो ज़िंदगी इक हताशा लगी सोचा समझा तो महँगी असासा लगी तब कहीं लोगों ने जानवर पाले जब उन को इंसानियत एक झाँसा लगी
Amit Kumar
1 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Amit Kumar.
Similar Moods
More moods that pair well with Amit Kumar's sher.







