पहले तो ज़िंदगी इक हताशा लगी सोचा समझा तो महँगी असासा लगी तब कहीं लोगों ने जानवर पाले जब उन को इंसानियत एक झाँसा लगी
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क्या ग़लत-फ़हमी में रह जाने का सदमा कुछ नहीं वो मुझे समझा तो सकता था कि ऐसा कुछ नहीं इश्क़ से बच कर भी बंदा कुछ नहीं होता मगर ये भी सच है इश्क़ में बंदे का बचता कुछ नहीं
Tehzeeb Hafi
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ले दे के अपने पास फ़क़त इक नज़र तो है क्यूँँ देखें ज़िंदगी को किसी की नज़र से हम
Sahir Ludhianvi
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सैर कर दुनिया की ग़ाफ़िल ज़िंदगानी फिर कहाँ ज़िंदगी गर कुछ रही तो ये जवानी फिर कहाँ
Khwaja Meer Dard
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मैं ने जो कुछ भी सोचा हुआ है, मैं वो वक़्त आने पे कर जाऊँगा तुम मुझे ज़हर लगते हो और मैं किसी दिन तुम्हें पी के मर जाऊँगा
Tehzeeb Hafi
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गले तो लगना है उस से कहो अभी लग जाए यही न हो मेरा उस के बग़ैर जी लग जाए मैं आ रहा हूँ तेरे पास ये न हो कि कहीं तेरा मज़ाक़ हो और मेरी ज़िंदगी लग जाए
Tehzeeb Hafi
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सारे पंछी तो आख़िर में उड़ जाते हैं पेड़ बस देखते पेड़ कटते हुए
Amit Kumar
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वो रूठ कर गया मुझ सेे ऐसे एक दिन की जैसे था ही नहीं वो तो मेरे दस्तरस में
Amit Kumar
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ये निशानी रख लो अपनी पास अपने क्या करूँँगा अब मैं इक पुर्ज़ा बचाकर
Amit Kumar
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नहीं है बचा कुछ भी अब पास मेरे चले जा चुके हैं सभी ख़ास मेरे उसे याद मैं जो न रक्खा करूँँ तो नहीं आती दुनिया भी ये रास मेरे
Amit Kumar
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अच्छे ख़ासे उदासी में बैठे थे हम कैमरा देख के हम को हँसना पड़ा
Amit Kumar
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