सारे पंछी तो आख़िर में उड़ जाते हैं पेड़ बस देखते पेड़ कटते हुए
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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सीख ली मैं ने भी दुनियादारी वर्ना मैं ख़ुद-कुशी से मर जाता
Amit Kumar
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ये निशानी रख लो अपनी पास अपने क्या करूँँगा अब मैं इक पुर्ज़ा बचाकर
Amit Kumar
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अच्छे ख़ासे उदासी में बैठे थे हम कैमरा देख के हम को हँसना पड़ा
Amit Kumar
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वो रूठ कर गया मुझ सेे ऐसे एक दिन की जैसे था ही नहीं वो तो मेरे दस्तरस में
Amit Kumar
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पहले ज़िंदगी के तुम अजाब देखो फिर गर चाहो तो इस के ख़िताब देखो
Amit Kumar
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