वो सामने था तो कम कम दिखाई देता था चला गया तो बराबर दिखाई देने लगा
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किताब फ़िल्म सफ़र इश्क़ शा'इरी औरत कहाँ कहाँ न गया ख़ुद को ढूँढ़ता हुआ मैं
Jawwad Sheikh
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हम को दिल से भी निकाला गया फिर शहर से भी हम को पत्थर से भी मारा गया फिर ज़हरस भी
Azm Shakri
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भीगीं पलकें देख कर तू क्यूँँ रुका है ख़ुश हूँ मैं वो तो मेरी आँख में कुछ आ गया है ख़ुश हूँ मैं वो किसी के साथ ख़ुश था कितने दुख की बात थी अब मेरे पहलू में आ कर रो रहा है ख़ुश हूँ मैं
Zubair Ali Tabish
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हुई मुद्दत कि 'ग़ालिब' मर गया पर याद आता है वो हर इक बात पर कहना कि यूँँ होता तो क्या होता
Mirza Ghalib
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तरीक़े और भी हैं इस तरह परखा नहीं जाता चराग़ों को हवा के सामने रक्खा नहीं जाता मोहब्बत फ़ैसला करती है पहले चंद लम्हों में जहाँ पर इश्क़ होता है वहाँ सोचा नहीं जाता
Abrar Kashif
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मुझ से आगे नज़र आने में ख़ुशी थी उस की मेरी ज़ंजीर से ज़ंजीर बड़ी थी उस की
Shaheen Abbas
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इक नक़्श हो न पाए इधर से उधर मेरा जैसा तुम्हें मिला था मैं वैसा जुदा करो
Shaheen Abbas
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तेरी ख़ुशबू को लुटाते हुए आते जाते बाक़ी बचता है जो इंसान कहाँ जाता है
Shaheen Abbas
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मैं बार बार तुझे देखता हूँ इस डर से कि पिछली बार का देखा हुआ ख़राब न हो
Shaheen Abbas
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हमें इतनी बड़ी दुनिया का पता थोड़ी था जहाँ हम तुम हुआ करते थे वहाँ रह गए हम
Shaheen Abbas
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